"तोड़ी दोस्ती" -----------------मुक्तेश्वर मुकेश अब फिर भेंट नहीं होगी। उसने क्यूं इतनी जल्दबाजी की ? क्यों छोड़ गया अपने यार दोस्त और परिवार को ? बड़ी निष्ठुरता दिखायी।हां, सुरेन्द्र की बात कर रहा हूं।मंहत सुरेन्द्र,भजन गायक सुरेन्द्र, हारमोनियम वादक सुरेन्द्र,मेरा बाल सखा सुरेन्द्र! समूचा जीवन चक्र घूम रहा मेरी आंखों में। पल पल विपत्तियों का सामना करने, फिर भी मुस्कुराते रहने वाला इंसान, संकटों की आग में तिल तिल जलने वाला, आज श्मसान की आग में भस्म हो गया। खबर मिलते ही रो पड़ा। गांव की हर घटनाओं से लेकर सामाजिक विखंडन पर चर्चा होती