ममतामयी माँ

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                 ममतामयी माँ शीर्षक लगते हुए मन में आया मेरी मामतमायी  माँ लिखूँ ,तब मेरे अन्तर्मन ने मुझे टोका कि इतनी विराट ममता कि धारिणी  को मेरी कह कर सीमित क्यूँ करूँ| जिसके  कण कण में प्रेम ,सहानुभूति , करुणा, प्यार , ममत्व भरा हो उसे मेरी कह कर उस विरत व्यक्तित्व को सीमा में बब्ध्न तो उनके प्रति अनादर होगा| हाँ में बात कह रही हूँ श्रीमति उमराओ भंसाली जी कि ,जिनकी पूतरी होने का मुझे सौभाग्य प्रपट हुआ|में परम पिता परमेश्वर कि बहुत ही आभारी हूँ और प्रथर्णा करती हूँ के उनके व्यक्तित्व के कुछ अंश मेरे में