यमराज और Architect नेता

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आज से काफी दशक पहले यमलोक में भ्रमण करते हुए यमराज को यमलोक कि कार्यशैली में कुछ दिक्कतें दिखाई पड़ी , कि कैसे पृथ्वी लोक से आने वाली आत्माओं के आधे-अधूरे कागज़ हैं, पिता के नाम की वर्तनी हर कागज़ के साथ बदल जाती है, यमलोक में एंट्री फीस का भी कोई प्रावधान नहीं है, पृथ्वी लोक के पंडितों से ज़्यादा तो वहाँ के ढोंगी कमा लेते हैं और बचा-कुचा कर्मकांड से कमाया हुआ फंड यमलोक ट्रांसफर कर देते हैं, इस आधुनिक ज़माने में आज भी यमलोक में आउटडेटेड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सब को देख