(रात का अँधेरा हवेली में फैला है। तभी बिजली कड़कती है और तेज़ आवाज होती है। सिमरन डर के मारे करण के सीने से चिपक जाती है।)"सिमरन सहमी-सहमी थी।अपने डर और असहायपन में वह करण के सीने से चिपक गई।उसकी मासूमियत ने उसे इस तरह अपने पास खींच लिया कि करण पहली बार हड़बड़ाया।"(सिमरन किसी बच्चे की तरह पूरी तरह से सो गई। उसके छोटे हाथ करण की तरफ फैले हुए हैं।)"सिमरन ने पूरी तरह नींद में जाकर अपने डर को भुला दिया।किसी बच्चे की तरह वह सो गई—बेबस, मासूम और पूरी तरह निर्भर।"(करण उसकी नींद को देखते हुए बैठा