प्यार की परीभाषा - 5

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तुषार के घर में उस दिन माहौल थोड़ा अलग था महेश सुबह से ही खाँस रहे थे। पहले तो उन्होंने ध्यान नहीं दिया, लेकिन दोपहर तक उनकी तबीयत और ढीली लगने लगीसुशीला—  डॉक्टर को दिखा लेते हैंमहेश—  कुछ नहीं है ठीक हो जाएगालेकिन इस बार बात यहीं नहीं रुकी शाम को, जब तुषार ऑफिस से लौटा, तो घर का माहौल शांत थातुषार—  क्या हुआ?सुशीला— कुछ नहीं तुम्हारे पापा की तबीयत ठीक नहीं हैतुषार तुरंत उनके पास गया— पापा चलिए डॉक्टर के पास चलते हैंमहेश ने उसका हाथ पकड़ लिया—महेश— डॉक्टर बाद में पहले मेरी एक बात सुनतुषार चुप हो गया।महेश—