MTNL की घंटी - 14

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11 साल बाद ....सुबह के सात बज चुके थे।महक ने धीरे से करवट ली और बिस्तर से उठकर जैसे ही खिड़की खोली, एक ठंडी हवा का झोंका उसके गालों को चूम गया।धूप की एक मासूम सी किरण उसके चेहरे पर आकर ठहर गई —मानो कह रही हो, "मैं तुझसे प्यार करती हूँ..."महक ने अपनी दोनों हथेलियों से चेहरे को हल्के-हल्के रगड़ा, पर जिद्दी धूप वहीं बनी रही...शायद उसे सच में महक से प्यार हो गया था...प्यार होता भी क्यों न?36 की उम्र में भी महक किसी गुड़िया सी लगती थी —मासूम, सुंदर और हर जिम्मेदारी को मुस्कान से संभालने वाली।11