दिल की भूल - 2

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रात काफी हो चुकी थी।स्टेशन पर भीड़ धीरे-धीरे कम हो रही थी, लेकिन आरव अब भी उसी बेंच पर बैठा था। उसके हाथों में सिया की छोड़ी हुई किताब थी और दिमाग में उसकी आखिरी बात बार-बार घूम रही थी "अगर किस्मत ने चाहा… तो हम फिर मिलेंगे…"आरव ने घड़ी देखी। उसकी ट्रेन आने में सिर्फ दस मिनट बाकी थे।वो चाहता तो किताब वहीं जमा करके चला जाता, लेकिन ना जाने क्यों उसका दिल ऐसा करने को तैयार नहीं था।उसने किताब को अपने बैग में रखा और गहरी सांस ली।“शायद ये सिर्फ एक इत्तेफाक था…” उसने खुद से कहा।लेकिन दिल मानने