शाम का समय था। घर के बाहर गली में बच्चों की आवाज़ें आ रही थीं, लेकिन रवीना के घर के अंदर माहौल थोड़ा भारी था।रसोई में माँ और कोई औरत बैठी बात कर रही थीं। रवीना अंदर आकर चुपचाप पानी रखने लगी।औरत— तो काजल की बात आगे बढ़ी?माँ ने हल्की सी हँसी में बात टालने की कोशिश की—क्या बताएं दीदी पहले बड़ी वाली बैठी है कौन करेगा छोटी की शादीरवीना के हाथ वहीं रुक गए। उसने सिर झुका लियाऔरत— अरे आजकल तो लोग छोटी की भी कर देते हैंमाँ— हमारे यहाँ इतना आसान नहीं है लोग सीधे पूछते हैं बड़ी