सुबह अभी पूरी तरह उजली नहीं हुई थी। आसमान हल्का धुंधला था, और गाँव के उस हिस्से में एक अजीब सन्नाटा पसरा हुआ था। रात की घटनाओं के बाद किसी ने ठीक से नींद नहीं ली थी।आरव बाहर आँगन में खड़ा था। उसकी नजर सीधे उसी पेड़ पर टिकी थी। दिन की रोशनी में वो पेड़ सामान्य दिख रहा था लेकिन अब सब जानते थे कि वो सामान्य नहीं है।कबीर हाथ में एक छोटा बैग लिए बाहर आया। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह हल्की मुस्कान थी, लेकिन आँखें पूरी तरह सतर्क थीं।कबीर- चलें या अभी और सोचोगे?आरव- जितना सोचना