गाठें

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     उमा को आज अचानक ही अनिल मिल गया। ये उसके साथ कालेज में पढ़ता था। उमा से अक्सर उसकी सहेलियाँ कहती कि अनिल हमेशा ही उमा को देखता रहता है। उसे भी लगता कि अनिल उससे कुछ कहना चाहता है लेकिन न उसने कुछ कहा और ना ही यह कहानी आगे बढ़ सकी। कुछ दिनों पहले अचानक ही अनिल उसे बस स्टाप पर  मिला। वो बस उमा को देखता ही रहा। उमा ने ही अंधेरे मे तीर चलाने सी एक थोड़ी ऊंची आवाज निकाली " .अनिल.....! "  दूसरी तरफ से उसी स्वर मे तुरंत ही आवाज आई "