कामिनी कथा

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कामिनी कथा नगेंद्र साहित्य पुरस्कार 2020 के नामांकित एवं द्वितीय पुरस्कार विजेता---(1)“अरे देखो, कामिनी भी कैसी झुलस-सी गई है!”“शायद हमारा विरह सह नहीं पाई।”कामिनी के पेड़ के नीचे परमाऔर सुनील खड़े थे। झुर्रीदार हाथ एक-दूसरे में उलझे हुए। सुनील एक हाथ की लाठी के सहारे खड़ा था, और परमा सुनील के हाथ के सहारे। कामिनी के पेड़ के नीचे सफेद फूलों की मानो बाढ़ आ गई थी। सीमेंट से बना आँगन सफेद फूलों से ढक गया था। दोनों पेड़ के नीचे बैठ गए। बहुत प्यार से पाला था उन्होंने इस कामिनी को।“अच्छा, क्या हमारे बेटों की तरह कामिनी भी बड़ी हो