रात का वक्त…सड़क पर पसरा हुआ गहरा सन्नाटा…और उसी सन्नाटे को चीरती हुई5–6 ब्लैक लग्ज़री कारें,पूरी रफ़्तार में दौड़ रही थीं।ऐसा लगता था मानो हवा को नहीं,बल्कि हवा उन्हें रास्ता दे रही हो।काफ़िले के बीच वाली कार के अंदर—ड्राइवर ने धीरे से कहा,“बॉस… थोड़ा AC कम कर दूँ?”पर पीछे बैठे आदमी नेकोई जवाब नहीं दिया।क्योंकि उसकी आँखें ही काफी थीं।गहरी… ठंडी… और इतनी भयानक किसिर्फ़ एक नज़र देखड्राइवर का गला सूख गया।तभी ड्राइवर के बगल में बैठे आदमी नेथोड़ा गुस्से के साथ कहा—“घर से जैकेट पहनकर आने का बोला था ना…?”ड्राइवर शर्मिंदा होकर बोला,“सर… जल्दी में एयरपोर्ट के लिए निकला