13 वा धारावाहिक आपने आप मे एक अंतरमन की पुकार कह लो, ये काल कोठरी किसे के नसीब मे न हो, बस माथे की लकीरो की बेचैनी आदमी को कभी कभी ऐसी खोज पर ले जाती है कि पूछो मत। ( काल कोठरी 13 वी कड़ी )जिंदगी कब सरकल मे घूमने लगे कोई पता नहीं, जज्बात यहां पे कुछ नहीं है। सच मे यकीन करो जो तेरे साथ रह रहा है जरुरी नहीं, वो सब कार्य मे अच्छा ही हो।गेंदा राम से मिलने के बाद वो उस लड़की