मुंबई की भागती-दौड़ती ज़िंदगी के बीच, शहर के एक बेहद आलीशान और बड़े से बंगले के एक कमरे में गहरी खामोशी छाई हुई थी। कमरे की बड़ी सी कांच की खिड़की से बाहर का खूबसूरत नज़ारा दिख रहा था, लेकिन वहाँ बैठी लड़की का पूरा ध्यान सिर्फ और आठ उसके लैपटॉप की स्क्रीन पर था।यह लड़की कोई और नहीं, अंशिका प्रताप थी। अंशिका बड़ी ही संजीदगी और कॉन्फिडेंस के साथ अपने लैपटॉप पर एक बेहद ज़रूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। लैपटॉप की स्क्रीन पर एक वीडियो कॉल चल रही थी, जिसमें दूसरी तरफ कुछ लोग बैठे हुए थे।