_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप के एड़ी दू बार खियाला एक बार नीमन घर बर खोजे मे तऽ दोसर नीमन घर बर मे घटियावल बेटी के न्याय दियावे मे...बाकि ना नीमन घरे मिलेला ना ही मुअल बेटी के न्याय..।""हं ठीके नू कहलू कर्मा बोह...एड़ी केतनो खिया जाए बाकि नीमन घर बर ससुरार मिलल अब मुश्किल बा जइसे मुश्किल बा नासपिटा न्यायालय से पिड़ित के न्याय मिलल..खैर हमनी के का..! जेकर बेटी गइल उऽ जाने आ जेकर बेटा पे आरोप लागल बा उ जाने...।"_"हं हं.. हमनी के का चलऽ