दो मिनट बाद बहुत संयमीत लहजे मे बोले देव "आलोक ने मुझें तुम्हारा लिखा पत्र दिया था..तुम्हे फोन करने की हिम्मत जुटा रहा था की कान्हा की तबियत ज्यादा बिगड़ गयी और मुझें छोड़ कर चला गया...अब मेरी जिंदगी जीने का कोई मकसद नही था..पर तुम्हारे पत्र पर लिखी बात ने कुछ होने नही दिया मुझें ..तुम्हारी वजह से मेरे और मेरे कान्हा के चेहरे पर मुस्कुराहट आयी थी...इसलिए तुम्हे फोन किये बिना नही जा सकता था अपने बेटे के पास.. अब तो कोई जीने की वजह भी नही बची...थोड़े काम निपटाने थे...निपटा रहा हू..उसके बाद बेटे के पास जाऊंगा...मेरा