39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा है। ये बूटी भाँग की बहुत बीमारियों को खत्म कर देगी... ये दवाई की माफक है ऐसे तमाकू मे मिला कर ही बनता है। दियाल जिंदगी ऊपर नीचे पड़ाव दिखाती हुई चलती है, गोदली का समय सूर्य देव पश्चिम मे डूब रहे गंगा के जल मे पीला प्रकाश बिखेरे हुए था। आरती का माहौल बने हुए था... सब सन्यासी हम भी वहा