वर्कशॉप का दिन धीरे-धीरे करीब आ रहा था और उसके साथ ही रवीना और तुषार दोनों के भीतर हलचल भी बढ़ती जा रही थीसुबह का समय था रवीना आज थोड़ा जल्दी उठ गई थी उसके सामने आज सिर्फ रसोई का काम नहीं था, बल्कि एक अलग तरह की जिम्मेदारी भी थी। उसने जल्दी-जल्दी नाश्ता बनाया सबको परोसा और खुद चुपचाप तैयार होने चली गईआज उसने हल्के नीले रंग का सूट पहना जो बहुत साधारण था, लेकिन उस पर साफ-सुथरा और सलीकेदार लग रहा था। उसने आईने में खुद को देखा कुछ पल के लिए ठहरी फिर हल्की सी मुस्कान के