कुछ भी सामान्य नहीं था पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए और शरीर जैसे आधा ठोस, आधा धुआँकबीर - हाहाहा अब आया न दोस्त , क्या दोस्त खाएगा गोस्त कोई भी हिल नहीं रहा था आरव एक कदम आगे बढ़ाकबीर ने तुरंत अपने device की settings बढ़ा दीकबीर- field stable है लेकिन ज्यादा देर नहीं रोक पाएगामीरा की नजर उस आकृति पर टिकी थीमीरा- ये पूरी तरह यहाँ नहीं है आधी उर्जा बाहर हैं आधी अंदर।फिर वही आवाज गूंजी“वापस चल”इस बार साफ था ये आवाज रोहित के लिए थी रोहित के पैर जैसे जमीन में जड़ गए थे उसकी सांसें