तेरे मेरे दरमियान - 111

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रश्मी :- पर इन दो सालो मे क्या हमारी एक बार भी याद नही आई ..?आदित्य :- आई ... बहुत याद आई । आदित्य जानवी की और दैखकर कहता है --आदित्य :- मैं कैसे बताउ के एक - एक दिन मैने कैसे गुजारे ।जानवी समझ जाती है के ये बात उसी के लिए है । तभी वहां पर रागिनी आती है और आदित्य को गले लगाकर उसे अंदर लेकर चली जाती है ।जानवी (धीरे): - शायद… कुछ लोगों को फर्क पड़ता है…पर उन्हें समझने में देर हो जाती है…”आदित्य हल्का सा हंसता है…और वहां से चला जाता है पर उसकी आँखों