त्रिशा... - 48

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त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का साहस ही नहीं हुआ। उसे ऐसा लगा कि मानो वो सब उस पर हंसकर उसका मजाक उड़ा रहे है। वह खुद को बहुत ही हीन महसूस कर रही थी। तभी उसकी नजर गुनगुन पर पड़ी जो अपनी मां को देख रही थी और अपनी छोटी छोटी आंखों में मोटे मोटे आंसू भरे खड़ी है। अपनी बेटी का चेहरा