अयन धीरे-धीरे सोनाई की तरफ बढ़ा। उसकी आँखें अब भी गुस्से से जल रही थीं, लेकिन होंठों के किनारे हल्की सी मुस्कान खेल रही थी।अयन : “वाह… अब तो मुँह लगाकर जवाब देना भी सीख गई हो।”सोनाई थोड़ा पीछे हट गई। उसका गला सूख चुका था।— “मैं… मैंने तो कुछ गलत नहीं कहा…”अचानक अयन ने दोनों हाथ उसके पास दीवार पर रख दिए और उसे अपने बीच कैद कर लिया।— “गलत नहीं कहा… लेकिन किसने परमिशन दी मुझसे इस तरह बहस करने की?”सोनाई का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।— “आप… हमेशा मुझे डाँटते रहते हैं… इसलिए…”अयन थोड़ा झुककर धीमी