Ishq ka Ittefaq - 12

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मेहरा मेंशन की सुबह आज कुछ ज्यादा ही भारी थी. सूरज की रोशनी खिडकियों से अंदर तो आ रही थी, पर घर के कोनों में पसरी कडवाहट को दूर नहीं कर पा रही थी. सिया सुबह पाँच बजे ही उठ गई थी. उसने अपनी साधारण सी सूती साडी पहनी, बालों का ढीला सा जूडा बनाया और सीधे गायत्री दादी के कमरे की तरफ बढ गई.उसके लिए ये घर अब एक वर्क- प्लेस (काम की जगह) से ज्यादा कुछ नहीं था. दादी की जाच करने के बाद जब सिया रसोई की तरफ बढी, तो उसका सामना काम्या बुआ से हुआ. बुआ