जीवन की नई डोर - भाग 1

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दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों की एक बड़ी कॉलोनी थी।उसके चारों ओर टीन, प्लास्टिक और खपरैल से बने कई झोपड़ीनुमा घर बिखरे पड़े थे।सुबह होते ही पूरी बस्ती जाग उठती—कहीं कोयले से काली हुई औरतें पानी भरतीं,कहीं बच्चे आधी टूटी चप्पलों में स्कूल भागते,तो कहीं मजदूर हाथ में टिफिन दबाए फैक्ट्रियों की ओर निकल पड़ते।इसी चहल-पहल वाली बस्ती में मौसमी बैनर्जी अपने पति संजय मंडल और दो जवान होती बेटियों के साथ रहती थी।संजय हिन्दुस्तान पेट्रोलियम की गाड़ियां चलाता था।आमदनी बुरी नहीं थी।पर उसकी सबसे बड़ी समस्या थी—नशा।शाम ढलते