सुबह 9:10 बजे,ममता देवी : “सोनाई… अरे सोनाई! देख तो लड़की के कारनामे, कब से आवाज़ लगा रही हूँ फिर भी बिस्तर छोड़ने का नाम नहीं ले रही। अरे उठ, उठ!”ममता देवी की आवाज़ से कमरे की शांत फिज़ा हल्का सा काँप उठी। खिड़की के पर्दों के बीच से आती सूरज की नरम रोशनी बिस्तर पर पड़ रही थी, लेकिन उससे भी उस नींद की रानी पर कोई असर नहीं हुआ।उन्होंने फिर कहा,“बाद में कॉलेज के लिए लेट हो गई ना, तब मुझे दोष मत देना!”बिस्तर पर गोल होकर सोई लड़की ने चिड़चिड़े चेहरे के साथ आँखें खोलीं। बिखरे बाल