शाम धीरे-धीरे रात में बदल रही थी घर के बाहर अंधेरा गहराने लगा था और अंदर एक अजीब-सी खामोशी फैल गई थी इस बार कोई भी इसे सामान्य नहीं मान रहा थाआरव ने हॉल के बीच में खड़े होकर पूरे घर को देखा उसकी नजरें हर कोने को नाप रही थीं, जैसे वह किसी पैटर्न को समझने की कोशिश कर रहा हो।आरव- सब लोग एक ही जगह रहेंगे कोई अकेला नहीं जाएगा रितिका ने तुरंत सिर हिलाया आर्यन पहली बार पूरी तरह चुप था मीरा आँगन के किनारे खड़ी थी उसकी आँखें बंद थीं, जैसे वह किसी हल्की-सी तरंग को