रात की वो खौफनाक आंधी तो थम चुकी थी, पर कबीर के स्पर्श की जो थरथराहट सिया के बदन में उतरी थी, वो सुबह होने तक उसके जहन से गायब नहीं हुई थी. गेस्ट- हाउस के उस छोटे से कमरे में सुबह की ताजी धूप खिडकी से छनकर सीधे सिया के चेहरे पर पड रही थी.उसने अपनी भारी आँखें खोलीं और सबसे पहले सामने टेबल पर रखे लैपटॉप की तरफ देखा. स्क्रीन पर हॉस्पिटल सारा पुराना रिकॉर्ड एक्सेल शीट में एकदम सलीके से दर्ज था. रात भर बिना सोए, आँखों में चुभन और पीठ के दर्द को झेलते हुए उसने