अंधेरे में मोहब्बत

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अंधेरे में मोहब्बतरात के 2 बजे थे। शहर की सारी आवाज़ें जैसे सो चुकी थीं, लेकिन काव्या की आँखों में नींद नहीं थी। खिड़की के बाहर घना अंधेरा था, और भीतर उसके दिल में उससे भी गहरा सन्नाटा।काव्या को अंधेरा पसंद नहीं था… लेकिन अब अंधेरा ही उसकी आदत बन चुका था।उसकी ज़िंदगी में सब कुछ तब बदला, जब आरव उसकी दुनिया में आया।आरव… एक ऐसा नाम, जिसे सुनते ही उसके दिल की धड़कन बदल जाती थी। पहली बार वह उसे एक पुराने, सुनसान लाइब्रेरी में मिली थी। बारिश की रात थी, और काव्या एक कोने में बैठकर किताब पढ़