Episode 7 – धीरे-धीरे उभरते सवाल अगले दिन घर में हल्की-सी हलचल थी।कोई खुलकर कुछ नहीं कह रहा था,लेकिन सब कुछ इशारों में चल रहा था।कभी रसोई में धीमी आवाज़ में बातें होतीं,कभी माँ किसी रिश्तेदार से फोन पर मुस्कुराकर बात करतीं,कभी पापा चुपचाप अख़बार पढ़ते हुएबीच-बीच में Priyam की तरफ देख लेते।सब सामान्य था।फिर भी कुछ बदल चुका था।Priyam को ऐसा लग रहा था जैसेहर मुस्कान के पीछे कोई उम्मीद छुपी हो,और हर सवाल के पीछे कोई फैसला।वह ड्रॉइंग रूम में बैठी थी।टीवी चल रहा था,लेकिन उसका ध्यान कहीं और था।स्क्रीन पर बदलते दृश्यउसे सिर्फ रंगों की तरह दिख रहे