शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा। गुमटी से लगी दुकान बंद थी। वहीं सीढ़ियों पर एक महिला और उसकी लगभग पांच साल की बच्ची बैठी थी । दोनों ठंड से कांप रहे थे। महिला सभ्य परिवार की लग रही थी उसके चेहरे पर चिंता स्पष्ट दिख रही थी। अशोक का ध्यान उस ओर चला गया। सिगरेट खत्म करके अशोक ने आखिर उस महिला की ओर