वहीं अभी तक हमने पड़े की एक राक्षसी आई ओर उस राक्षस को मृत्युंजय के नाम से बुला रही थी। राक्षसी : मृत्युंजय तुम कब आए । मुझे बताए भी नहीं।आर्या : ओह तो इस राक्षस का नाम मृत्युंजय है। ( खुद के मन में हस्ते) जैसे नाम वैसे काम है इसका फिर खुद का काम कंटिन्यू करने लगती है और उनके बात भी सुनने लगती है।( मृत्युजंय : ये भी कहानी का मैंने कैरेक्टर है हीरो ये इस उनके लोगों में से सब से शक्तिशाली है बड़े बड़े खतरनाक मिशन में इन्हें भेजे जाते है पूरे राक्षस इनसे डरते है ये