भाग - 11 निशा का हाथ कुंडी पर ही रुक गया उसकी नजर दरवाजे के नीचे दिख रहे पैरों पर अटक गई गीली मिट्टी और एड़ियाँ सामने की तरफ कुछ सेकंड के लिए उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया।बाहर फिर वही आवाज आईरोहित- निशा.. दरवाज़ा खोलोआवाज़ बिल्कुल वही थी वही ठहराव… वही लहजा लेकिन अब निशा को यकीन हो चुका था कि बाहर जो भी है वो उसके पिता नहीं हैं उसने धीरे से हाथ पीछे खींच लियाउसकी सांसें तेज हो गईं, लेकिन उसने खुद को