कुंम्भन जौर जौर से हंसते हुए कहता है।" मृत्यु की तुम परिचय मांग रहे हो मुर्ख । आज तेरा अंतिम रात्री है। और तेरे पास केवल कुछ ही छण शेष है। इससे पूर्व के मैं तुम्हें मृत्यु दंण्ड दूं । बता के मेरी पुत्री कुंम्भनी का मणी कहां है?" निलु डर से थर थर काँप रहा था और अपनी कंप कंपाती हूई आवाज मे कहता है।" क..क..कौन सा मणी ?" कुंम्भन गरजते हुए निलु को अपने एक हाथ से उपर हवा मे लटका देता है। और कहता है। " मुझे मुर्ख समझने की भूल ना करो मानव। मैं उसी मणी के विषय मे बोल