*शीर्षक: अधूरा ख्वाब और एक साजिश* आसमान से गिरती बारिश की बूंदें फिजा में एक अजीब सी खामोशी और रोमांस घोल रही थीं। टेरेस पर प्रज्ञा और अभि एक-दूसरे के बेहद करीब थे। सफेद नाइट सूट में भीगी हुई प्रज्ञा किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। अभि ने अपनी बाहों के घेरे में उसे इतनी मजबूती से जकड़ा था कि प्रज्ञा को दुनिया की और किसी चीज की सुध नहीं थी। बारिश की बूंदे प्रज्ञा के बदन को छूती हुईं जा ही रही थी कि अभि के होंठ आने वाली हर बूंद को उसकी छाती के पास ही रोक