पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 8

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दिन बीतते गए…और कृष्णा ने अब अपनी पूजा-पाठ और बढ़ा दी थी। सुबह मंदिर…घर में मंत्र…रात को रामायण का पाठ…जैसे वो हर पल सिद्धिका के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना रहा हो।सिद्धिका अब पहले से शांत रहने लगी थी…उसकी आँखों की लाल चमक लगभग गायब हो चुकी थी।लेकिन उसकी कमजोरी बढ़ती जा रही थी।और शायद…अंधकार ये सब देख रहा था।रात बहुत भारी थी।बाहर तेज़ हवा चल रही थी…और सिद्धिका कृष्णा के पास सोई हुई थी।अचानक उसने खुद को एक अजीब जगह पर खड़ा पाया।चारों तरफ काला धुआँ…जमीन पर अजीब निशान…और हवा में डरावनी फुसफुसाहटें…सिद्धिका ने नीचे देखा वो अपने