भाग २ सुनी को दोस्ती करने की आदत ही थी। वह जगत मित्र थी। उसकी बहुत सी सहेलियां थीं, और वह उन सब के बीच ऐसे रहती थी जैसे वह सबकी लीडर हो। सारी सहेलियां सुनी के पीछे -पीछे घूमा करती थीं। ये वो दौर था जब किसी लड़की का कोई दोस्त हो यह अपवाद ही होता था , और मैं सुनी के जीवन का वो अपवाद था। वह मेरे साथ उतनी ही फ्री रहती थी जितनी अपनी सहलियों के साथ रहती थी। इसका कारण जो मुझे लगता था वह... मैं उसकी हर बात मानता था। अपना दिमाग खुद के लिए