आन्तरिक पुकार

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ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्तों में आता है। एक प्रचलित रूप में पूरा मन्त्र इस प्रकार मिलता है— मन्त्र (ऋग्वेद)इमं नः शृणु हवम् इन्द्र यथा नःसखा सखिभ्यः सुतसोमः पिबा नः॥ पदच्छेद (शब्दार्थ)इमम् = इस (प्रार्थना को)नः = हमारीशृणु = सुनोहवम् = आह्वान / पुकारइन्द्र = हे इन्द्र (परम शक्तिशाली देव)यथा = जैसेनः सखा = हमारे मित्र बनकरसखिभ्यः = मित्रों के लिएसुतसोमः = सोमरस (भक्ति/यज्ञ का प्रसाद)पिब = पान करो भावार्थ-- हे इन्द्र!  हमारी इस प्रार्थना को सुनो। जैसे तुम अपने मित्रों के प्रति स्नेह रखते हो, वैसे