------*एक दर्द-ए-दिल की शुरुआत* *"जिसे मैंने पलकों पर बिठाया, वो आज दुश्मन की गोद में उसकी बेटी खिला रही थी"*पार्टी की चमक-धमक के बीच, अभि ने जैसे ही कदम रखा, उसकी सांसें थम गईं। सामने स्टेज पर *शौर्य सिंघानिया* के साथ *प्रज्ञा* खड़ी थी, और उनकी उंगली थामे एक नन्ही सी बच्ची - *रिया*। अभि के पैरों तले जमीन खिसक गई। सीना चीर देने वाला मंजर था। अगर दोस्त *रितेश* ने कंधा ना थामा होता, तो अभि वहीं ढेर हो जाता। प्रज्ञा की नजरें सिर्फ अभि पर टिकी थीं। वो आंखों से कुछ कह रही थी, पर लब खामोश थे। उधर अभि की