दिन बीतते गए…लेकिन हर दिन के साथ सिद्धिका कमजोर होती जा रही थी।अब वो पहले जैसी नहीं रही…जिसमें कभी अंधकार की ताकत थी। अब वही शरीर थक चुका था। उसे चलने में भी तकलीफ होने लगी थी…कभी-कभी तो वो दो कदम चलकर ही रुक जाती।उसका वो खूबसूरत चेहरा…जो कभी रहस्यमयी चमक से भरा रहता था अब धीरे-धीरे मुरझाने लगा था। आँखों की लाल चमक गायब थी…चेहरे की चमक फीकी पड़ गई थी…जैसे उसकी पहचान ही खो रही हो।उसकी शक्तियाँ…जो कभी उसे सबसे अलग बनाती थीं अब धीरे-धीरे खत्म हो रही थीं। ना वो किसी को महसूस कर पा रही थी…ना