लखनऊ से जब आप कस्बापुर की ओर आते हैं,तो कस्बापुर शुरू होते ही अनुसूया रोड पड़ती है— खूब चौड़ी और वृक्षदार। अनुसूया रोड पर एक विशाल हरा बंगला है : अनुसूया सदन। बंगले को उस का नाम दिया, मेरे नाना ने । जिस वर्ष उन्हों ने मेरे पिता को अपना घर- जमाई बनाया। और सड़क को अपना नाम मिला जब मेरी मां का देहांत हुआ।