एपिसोड 11: बच्चों की उपलब्धियां और समाज में नई सोच स्कूल की शुरुआत को कुछ महीने बीत चुके थे। रिया और आरव का सपना अब हकीकत बन चुका था। पटना की गलियों में बच्चों की हंसी और पढ़ाई की आवाज़ गूंजने लगी थी। समाज धीरे-धीरे बदल रहा था। ---बच्चों की पहली उपलब्धियांरिया हर सुबह बच्चों को कहानियां सुनाती। उसकी कहानियों में साहस, उम्मीद और सपनों की ताकत होती। बच्चे मंत्रमुग्ध होकर सुनते और सीखते। एक दिन एक छोटी बच्ची, सुमन, ने कहा, “मैम, मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं।” रिया ने मुस्कुराकर कहा, “हाँ बेटा, तुम जरूर बनोगी। सपनों को सच करने के लिए मेहनत