MTNL की घंटी - 10

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कभी-कभी इंसान इतना भावुक हो जाता है कि जो भावना शब्दों में नहीं ढलती, वो आँखों के रास्ते बाहर निकल जाती है..."ताया जी... थोड़ा पानी पी लीजिए," महक ने शून्य में ताकते हुए बैठे ताया जी से कहा।ताया जी ने चुपचाप गिलास उठाया और एक ही सांस में पानी गटक गए... मानो गले में कोई टीस अटक गई हो, जिसे निकाले बिना साँसे आगे बढ़ ही न पाएँगी।"ताया जी... फिर क्या हुआ? क्या सोनिया से शादी हो गई थी?"महक को थोड़ा बहुत पता तो था — देव ने कभी-कभी कुछ बातें इशारों में कही थीं — लेकिन आज वो सब