Devil की दास्तान - 2

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ऑफिस का कैबिन। AC की ठंडी हवा चल रही है, लेकिन सिमरन के माथे पर पसीना है। वो डरी-सहमी कुर्सी पर बैठी है। उसके सामने करण, गहरी नज़रों से लगातार उसे घूर रहा है।"कभी-कभी डर शब्दों से नहीं... निगाहों से पैदा होता है।सिमरन के लिए करण की लाल आँखें वही डर थीं... जो उसके सीने की धड़कनें रोक रही थीं।"सिमरन फाइल्स में नोट्स लिख रही है, लेकिन उसका ध्यान बार-बार करण की आंखों की तरफ चला जाता है। वो घबराकर नज़रें झुका लेती है।सिमरन (मन ही मन) में बोली - हे भगवान जी! ये बार-बार मुझे क्यों देखते हैं? ये इंसान