ममता ...एक अनुभूति... - 3

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केशव वैसे ही अपनी परेशानी से जूझ रहा था उस पर यह लड़की उसकी समझ से बाहर थी।दिल तो भावनात्मक रूप से लड़की और बच्चे के साथ जुड़ रहा था पर दिमाग साथ देने से मना कर रहा था।दरभंगा स्टेशन आते ही भीड़ अपने अपने गंतव्य की और जाने के लिए ट्रेन से उतरने लगी।उसने खिड़की की तरफ देखती लड़की पर हल्की नजर डाली पर बच्चे को देखने की हिम्मत नहीं की...आखिर दिमाग की जीत हुई ...वो बिना बोले चुपचाप बैग उठा कर स्टेशन से नीचे उतर गया।आंखों के आगे बच्चा घूम रहा था पर वो कोई मुश्किल में नहीं