"वो दूसरी मुलाकात"हिंदी कहानी (लगभग 2000 शब्द) लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाकभी-कभी ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें ऐसी होती हैं जो पहली बार में अधूरी रह जाती हैं, और दूसरी बार में पूरी कहानी बन जाती हैं। यह कहानी है "वो दूसरी मुलाकात" की—जहाँ दो अनजाने चेहरे, दो अलग-अलग रास्ते, और दो अधूरी इच्छाएँ एक दूसरे से टकराती हैं।---पहला दृश्य: अनजाने रास्तेराहुल दिल्ली की भीड़-भाड़ वाली मेट्रो से निकलकर कनॉट प्लेस की ओर बढ़ रहा था। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन आँखों में एक अजीब-सी बेचैनी। पहली मुलाकात को महीनों बीत चुके थे। वह मुलाकात अचानक हुई थी—एक कॉफी शॉप में, जहाँ