तीनों एकदम सन्न खड़े थे…नज़रें ज़मीन पर जमी हुईं…वो चौथी परछाई…स्पष्ट दिख रही थी…रिद्धि की उंगलियां कांपने लगीं वो बोली—त… तुम लोग भी देख रहे हो ना…?अपर्णा ने धीमे से सिर हिलाया और बोली—हां… ये… ये हमारे साथ चल रही है…विशाल कुछ बोल नहीं पाया…कुछ सेकंड…बस सन्नाटा…फिर अचानक , रिद्धि ने अपनी आंखें कसकर बंद कीं…और जोर से मिचमिचाईं…वो बोली - नहीं! ये सच नहीं है… ये बस डर है…अपर्णा ने भी वैसा ही किया…विशाल ने भी गहरी सांस लेकर आंखें बंद कीं…तीनों ने एक साथ…दोबारा आंखें खोलीं…और…सड़क पर…अब सिर्फ तीन परछाइयां थीं…कोई चौथी नहीं…। तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा…कुछ