कमरे में सन्नाटा नहीं था वो साँस ले रहा था दीवारें फर्श हवासब कुछ जैसे जिंदा हो आरव और कबीर दरवाज़े के अंदर खड़े थेउनके सामने मीरा या जो भी अब मीरा थीफ्लैशलाइट फिर से जली इस बार चेहरा साफ दिखाआधा वही मीरा डरी हुई कमजोर मदद माँगती हुई और आधा काला सूखा जैसे किसी ने उसकी त्वचा के नीचे अंधेरा भर दिया होकबीर ने धीरे से कहा— मैं suggest करता हूँ… हम politely exit ले लेंआरव ने कदम आगे बढ़ाया— मीरा मेरी तरफ देखमीरा का इंसानी हिस्सा काँपा— आ…रव… जाओलेकिन उसी पल उसका दूसरा हिस्सा हँसा—“अब भागने का option