कमरा — हल्की-सी अंधेरी रोशनी…श्राव्या बेहोश कृषांत की बाँहों में…और सामने हवा में तैरती प्रिशा…कृषांत धीरे से श्राव्या को सोफे पर लिटाता है…फिर उठकर प्रिशा की तरफ बढ़ता है…।कृषांत (तेज, गुस्से में) बोला - तुम क्या सोचती हो प्रिशा…ये जो तुम कर रही हो… बहुत बड़ा भला काम है?प्रिशा की आँखें और चमकने लगती हैं…कृषांत (कड़वे शब्दों में) बोला - शर्म आती है मुझे… तुम्हें अपनी assistant बोलने में भी…कितनी घटिया लड़की हो तुम!प्रिशा का चेहरा दर्द और गुस्से से भर जाता है…।प्रिशा (चीखते हुए) बोली - मैं घटिया नहीं हूँ!!!कमरे में तेज़ हवा चलने लगती है…कृषांत बिना डरे उसकी आँखों में देखता