Honted Jobplace - 12

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कमरा — रात गहरी हो चुकी है। बाहर हल्की हवा चल रही है… खिड़की अब बंद है… सब शांत है…कृषांत बिस्तर के किनारे बैठा है…उसकी बाहों में बेहोश श्राव्या है… उसका सिर उसके सीने पर टिका है। कृषांत की आँखों में नींद नहीं… सिर्फ चिंता…।वो धीरे-धीरे श्राव्या के बालों को सहलाता है…।कृषांत (धीरे, भारी आवाज़ में) बोला - तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा…कुछ भी हो जाए…।उसकी आवाज़ में दर्द साफ है…उसकी आँखों से एक आँसू गिरता है…श्राव्या के हाथ पर… कृषांत की आँखों के सामने वो सारे पल घूमने लगते हैं ।  8th फ्लोर की रात श्राव्या का डर प्रिशा