एकांश वर्शाली की हाथ को पकड़कर अपने कंधे पर रख देता है। और कहता है। > ये भी तो तुम्हारा ही है वर्शाली ! एकांश के मुह ये इतना सुनने के बाद वर्शाली सरमाने लगती है दौनो ही एक दुसरे को बाईक के शिशे मे दैखता है। दौनो ही एक दुसरे को दैखकर सरमाने लगता है और तब एकांश बाईक को धिरे धीरे आगे की और बड़ाने लगता है। उधर मिरा एकांश के कमरे मे शिशे मे अपने आपको दैखकर बस यही सौच रही थी के आज इस शिशे मे ऐसा क्या हो गया के ये शिशा मुझे भ्रम मे डाल रहा था। मैं